मदारिसे इस्लामिया दीनी सीमाओं के निगहबान और इस्लामी पहचान के रक्षक हैं

मदारिसे इस्लामिया दीनी सीमाओं के निगहबान और इस्लामी पहचान के रक्षक हैं

राबता मदारिस इस्लामिया के अखिल भारतीय अधिवेशन में मदरसों को अपनी सुरक्षा और सुधार के लिए क्रांतिकारी क़दम उठाने की हिदायत

देउबंद, 12 मार्च 2018 (प्रेस नोट)

 

दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम और राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती अबुल क़ासिम नोमानी ने कहा कि मदारिसे इस्लामिया गहराई से हालात का जायज़ा लेकर अपनी सुरक्षा और सुधार के लिए कुछ क्रांतिकारी क़दम उठाऐं। उन्होंने कहा कि इस समय सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम यह होगा कि मदारिसे इस्लामिया, पहले से अधिक, अपने अकाबिर के नेहज और तरीक़े पर अमल करें। उन्होंने कहा कि देश में एक विशेष विचारधारा के लोगों के सत्ता में आजाने और नकारात्मक इरादों को काम में लाने की इन के प्रयासों के कारण जो हालात पैदा हुए हैं उनकी दृष्टि से मदारिसे इस्लामिया की जिम्मेदारी और बहुत बढ़ गई है।

 

मुफ्ती अबुल क़ासिम नोमानी ने आज दारूल उलूम देवबंद के राबता मदारिस इस्लामिया की मजलिस उमूमी (माहासभा) के अखिल भारतीय अधिवेशन में भारत के कोने-कोने से आए उलमा और बुद्धिजीवियों के सामने खुत्बा-ए-सदारत पेश करते हुए उलमा और मदरसों के ज़िम्मेदारों को विशेष रूप से आकर्षित किया कि मदारिस की प्रशासनिक और बौद्धिक स्वतंत्रता के लिए जागरूक और चिंतित रहना चाहिए; क्योंकि मदरसों का वास्तविक अस्तित्व तभी तक है जब तक उनकी बौद्धिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता बरक़रार है; इसलिए इसकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है। देश के वर्तमान विषम परिस्थितियों और बातिल शक्तियों द्वारा मदारिसे इस्लामिया के खिलाफ साजिशों का मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस मामले में उन्होंने मदारिसे इस्लामिया को सरकारी सहायता से बचें रहने की हिदायत की।

 

नोमानी साहब ने मदारिस की शिक्षा प्रणाली के सिलसिले में कहा कि पाठ्यक्रम आंशिक संशोधनों से गुज़रता रहा है, लेकिन वह विशेष संरचना और मूल भावना पर आधारित है और इसी पर बने रहना मदारिस के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम से अधिक महत्वपूर्ण मुद्दा इस्लामिक तरबियत है जिस पर बहुत ज्यादा चिंता से विचार करने की जरूरत है; मदरसों के फुज़ला में ज्ञान की गहराई के साथ नैतिकता और अच्छा व्यवहार बेहद ज़रूरी है। नोमानी साहब ने कहा कि मदारिसे इस्लामिया का प्राथमिक उद्देश्य शरीयत के इलमी व दीनी विरासत को उसकी असली रूप में सुरक्षित रखना है और मदारिस को इस महान उद्देश्य से मुंह मोड़ना नहीं चाहिए और पूरे सिस्टम की फिर से समीक्षा लेकर अपने सभी कार्यों और गतिविधियों को अकबिर के आधार पर जारी रखना चाहिए।

 

मदारिस के आंतरिक प्रणाली में सुधार पर ज़ोर देते हुए नोमानी साहब ने कहा कि मदारिस में शूराई नेज़ाम को पूरी अमानतदारी के साथ लागू करना चाहिए, छात्रों और शिक्षकों और प्रशासकों के लिए आचार नियमावली तैय करना चाहिए और सबको उसका पाबंद रहना चाहिए। मदारिस के सभी हिसाब किताब को बिल्कुल साफ़ रखने और ऑडिट कराने की व्यवस्था करनी चाहिए।

 

मजलिसे उमूमी की यह बैठक दारुल की जामे रशीद में आयोजित की गई थी जिसमें पूरे देश के प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण मदारिस के हज़ारों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिवेशन की बैठक की शुरुआत क़ारी अब्दुर्रऊफ़ तज्वीद शिक्षक दारुल उलूम की क़िराअत से हुई और निज़ामत की जिम्मेदारी मौलाना शौकत अली क़ासमी बस्तवी महासचिव राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया ने अंजाम दी।

 

बैठक में राबता मदारिसे इस्लामिया अरबिया के महासचिव मौलाना शौकत अली क़ासमी ने सचिव रिपोर्ट पेश की और केंद्रीय कार्यालय राबता मदारिस और देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय प्रांतीय राबता मदारिस की शाखों के काम काज पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि राबता मदारिसे इस्लामिया एक अखिल भारतीय संगठन है जिसके बुनयादी मक़ासिद दीनी मदारिस के शिक्षा प्रणाली को सक्षम बनाना और दरपेश समस्याओं और कठिनाइयों के निवारण की कोशिश के साथ साथ मदरसों के खिलाफ की गयी साजिशों पर नजर रखना और पूरी कोशिश से इनको खत्म करना है।

 

महत्वपूर्ण बात यह है कि 11 / मार्च को मग़रिब की नमाज़ के बाद दारुल के गेस्ट हाउस में राबता मदारिस की कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई थी जिसकी अध्यक्षता हजरत मौलाना मुफ्ती अबुल क़ासिम नोमानी साहब मोहतमिम दारुल उलूम देवबंद व अध्यक्ष राबता मदारिस ने की। इस बैठक में मदारिसे इस्लामिया को दरपेश समस्याओं और कठिनाइयों के संबंध में विचार-विमर्श किया गया और उनके समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

 

राबता मदारिस के मजलिस उमूमी के इजलास की पहली बैठक में अपने महत्वपूर्ण भाषण में दारुल उलूम देवबंद के शैखुल हदीस हज़रत मौलाना मुफ्ती सईद अहमद पालणपुरी ने कहा कि मदारिसे अरबिया को अधिक उपयोगी बनाने के लिए शिक्षा प्रणाली का अनुकूलन सबसे जरूरी है। महासचिव इस्लामिक फेक़ह अकेडमी मौलाना खालिद सैफुल्लाह रह़मानी ने अपने संबोधन में कहा कि छात्रों की बौद्धिक तरबियत और उनके अंदर दीनी ह़मीयत व ग़ैरत पैदा करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने मदरसों के आंतरिक और वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता के महत्व और जरूरत को स्पष्ट किया और मदरसों को चुनौतियां के सिलसिले में अवगत रहने पर रोशनी डाली।

 

राबता मदारिस की उद्घाटन बैठक में राबता मदारिस के महासचिव मौलाना शौकत अली कासमी ने अखिल भारतीय अधिवेशन की तरफ से एक घोषणा प्रस्तुत की जिसमें मदारिसे इस्लामिया को आंतरिक और बाह्य सुधार की तरफ ध्यान दिलाया गया। दर्शकों ने इस घोषणा का ज़ुबानी हाथ उठाकर समर्थन किया और फिर प्रांतीय अधिकारियों ने इस सिलसिले में अपना विचार व्यक्त किआ।

 

राबता मदारिस के कार्यकारिणी और मजलिस उमूमी की बैठक में प्रांतीय अध्यक्षों और ज़िम्मेदारों में विशेष रूप से मौलाना सैय्यद अरशद मदनी, मौलाना क़ारी सैय्यद मुहम्मद उस्मान साहब, मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी, मौलाना अब्दुल ख़ालिक़ मद्रासी, मौलाना क़मरुद्दीन गोरखपुरी, मौलाना नेअमतुल्लाह आज़मी, मौलाना ह़बीबुर्रह़मान आज़मी, मुफ्ती ह़बीबुर्रह़मान खैराबादी, मौलाना अब्दुल ख़ालिक़ संभली, मौलाना रह़मतुल्लाह कश्मीरी, मौलाना मुफ्ती मुहम्मद इस्माईल मालेगांव, मौलाना इब्राहिम मलिक, मौलाना मह़मूद मदनी, मौलाना अनवारुर्रह़मान बिजनौर, मौलाना मह़मूद खीरवी, मौलाना निज़ामुद्दीन खामोश मुंबई, मुफ्ती अहमद देवलवी गुजरात, मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रह़मानी, मौलाना मुहम्मद सुफियान क़ासमी दारूल उलूम वक्फ, मौलाना अशफाक़ सरायमीर, मौलाना मतीनुलहक़ उसामा कानपुर, मौलाना क़ारी शौकत अली वेट, मौलाना अब्दुलक़वी हैदराबाद, मौलाना मुहम्मद क़ासिम पटना, मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी कोलकाता, मौलाना अब्दुल क़ादिर असम, मौलाना ज़ैनुल आबिदीन कर्नाटक, मौलाना शमसुद्दीन बिजली, मौलाना मुहम्मद इलयास हरियाणा, मौलाना ख़ालिद मेवात, मौलाना सिराजुद्दीन मणिपुर, मौलाना मुमताज़ अह़मद शिमला, मौलाना अब्दुश्शकूर साहब केरल, क़ारी मुहम्मद अमीन राजस्थान, मौलाना मुहम्मद फारूक़ उड़ीसा, मौलाना मुहम्मद मंज़ूर कोलकाता, मौलाना अली ह़सन मज़ाहिरी, मुफ्ती सईदुर्रह़मान मुंबई, मौलाना मुहम्मद रांची, मौलाना असजद क़ासमी मुरादाबाद, मौलाना महमूद दरियाबादी वग़ैरा ने शिरकत की।

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प्रेस कमेटी, दारुल उलूम देवबंद

 
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Published Online by: Internet Dept., Darul Uloom - Deoband