दारुल उलूम देवबंद के हदीस के प्रमुख शिक्षक हज़रत मौलाना शैख अब्दुल हक़ आज़मी का निधन

देवबंद, 31 / दिसंबर 2016

प्रसिद्ध आलिम, दारुल उलूम देवबंद के हदीस के महान शिक्षक व शैख षानी हज़रत मौलाना अब्दुल हक़ साहब का आज़मी 30 / दिसंबर की शाम को एक संक्षिप्त बीमारी के बाद देवबंद में निधन हो गया। आप 88 वर्ष के थे। आपकी मृत्यु से उलमा और मदरसों के विद्दार्थी और आम मुसलमानों में शोक की लहर दौड़ गई।

दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम हज़रत मौलाना मुफ्ती अबुल क़ासिम साहब नोमानी ने हज़रत शैख के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे दारुल उलूम देवबंद और मिल्लते इस्लामिया के लिए बड़ा नुक़सान बताया। आपने कहा कि शैख के निधन से भारत में हदीस के शिक्षण का एक अध्याय बंद हो गया और मुस्लिम दुनिया एक महान मुहद्दिस से वंचित हो गया।

हज़रत मौलाना आज़मी की जनाज़ह की नमाज़ दारुल उलूम देवबंद के दारे जदीद (नई इमारत के कैंपस) में शाम साढ़े तीन बजे हज़रत मौलाना सय्यद अरशद साहब मदनी की इमामत में अदा की गई और हज़ारों शोक संतप्त उलमा व छात्रों की उपस्थिति में आपको क़ासमी कब्रिस्तान में दफन किया गया।

आप 1982 से दारुल उलूम देवबंद में शिक्षण सेवाओं को अंजाम दे रहे थे और बुखारी शरीफ भाग न० दो और मिश्कातुल  मसाबीह़ आदि किताबों का शिक्षण आप से संबंधित था। आप दारुल उलूम देवबंद के लोकप्रिय शिक्षकों में से थे। आप देश-विदेश बुखारी शरीफ के लेक्चर के लिए आमंत्रित किया जाता था। आपने अपने जीवन के साठ साल इस्लामि शिक्षों विशेष तौर पर बुखारी शरीफ की शिक्षण में बिताया। एक अनुमान के अनुसार चालीस हजार से अधिक छात्रों ने आप से पढ़कर आलमिय्यत और फज़ीलत की डिग्री प्राप्त की। आपके निधन से एक युग का अंत हो गाया। आपकी व्यक्तित्व धर्म एवं शील संयम, ज्ञान और प्रक्रिया और सादगी एवं विनम्रता का सुंदर संगम थे। आप सादगी और विनम्रता के कारण आप आम लोगों में लोकप्रियता थे।

हज़रत मौलाना अब्दुल हक़ साहब जगदीशपुर जिला आज़मगढ़ में 1928 में पैदा हुए। प्रार्थमिक मदरसा बैतुल उलूम सरायमीर में हासिल की। बाद में दारुल मऊ में एडमिशन लेकर अरबी के कक्षा सात तक शिक्षा हासिल की। आप प्रसिद्ध आलिम हज़रत मौलाना मोहम्मद मुस्लिम साहब जौनपूरी के सौतेले बेटे और प्रशिक्षित थे। आपने 1374 हिज्री / 1955 ईसवी को दारुल उलूम देवबंद में शैखुल इस्लाम हज़रत मौलाना हसैन अहमद मदनी और अन्य शिक्षकों से हदीस की आखरी कक्षा (दौरह ए हदीस) पूरी की। वहां से पढ़ने के बाद कई स्थानों पर शिक्षण सेवाओं को अंजाम दिया, विशेष रूप से मतलउल उलूम वाराणसी, जामिया हुसैनिया गिरिडीहा झारखंड और दारुल उलूम मऊ नाथ भंजन में शिक्षण दिया और शैखुल हदीस एवं शिक्षक अध्यक्ष के पदों पर रहे।

 
Hadhrat Sheikh Maulana Abdul Haq Azami Passes Away
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Published Online by: Internet Dept., Darul Uloom - Deoband