मौजूदा हालात में किसी किस्म की नकारात्मक सोच या मायूसी का शिकार ना हों

राबता मदारिस के अधिवेशन देश के मदरसों के 3500 से अधिक उलमा शामिल हुए

देवबन्द - 24 मार्च 2015

      दारुल उलूम देवबन्द के मोहतमिम मुफ़्ती अबुल क़ासिम ने कहा कि मदारिस इस्लामिया दुनिया व देश के मौजूदा हालात में किसी किस्म की नकारात्मक सोच या मायूसी का शिकार होने से परहेज़ करें और मुसलमानों को भी सकारात्मक अन्दाज़ में सोचने की शिक्षा दें। सभी देशवासियों के साथ आपसी भाईचारे और अमन की सोच पर अमल करते हुए गै़र मुस्लिम भाईयों को भी मदरसों से सीधे सम्पर्क करने का मौक़ा दें तथा इसके लिये आमंत्रित करें।

      दारुल उलूम देवबन्द के तहत क़ायम अखिल भारतीय राबता मदारिस अरबी के अधिवेशन की पहली बैठक में मौलाना मुफ़्ती अबुल क़ासिम नौमानी साहब मोहतमिम दारुल उलूम देवबन्द व अध्यक्ष राबता मदारिस ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सभी इस्लामी मदरसों से अपील की कि दुनिया व देश के मौजूदा हालात में किसी किस्म की नकारात्मक सोच या मायूसी का शिकार होने से परहेज़ करें और मुसलमानों को भी सकारात्मक अन्दाज़ में सोचने की शिक्षा दें।

      माननीय अध्यक्ष ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मदरसों का एक प्लेटफ़ार्म पर जमा होना और मदरसों के भीतरी और बाहरी हालात पर पर नज़र रखना वक़्त का एक अहम तक़ाज़ा और मदरसों की एक अहम ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि मदरसों का बुनियादी मक़सद शरीयत की इल्मी और दीनी विरासत की हिफ़ाज़त करना है और मदरसों को इससे बिल्कुल नहीं हटना चाहिये।

      अध्यक्ष ने कहा कि मदरसों में शूरा के निज़ाम को पूरी अमानतदारी के साथ लागू करना चाहिये और मदारिस के आय-व्यय को पूरी तरह पारदर्शी रखना और उसको समय पर आॅडिट कराना चाहिये। मदरसों के रजिस्ट्रेशन और इसकी जायदादों के दस्तावेजों को भी नियमानुसार तैयार करना चाहिये। मदरसों के भीतरी निज़ाम के सिलसिले में बैठक के अध्यक्ष ने मदरसों के पूरे पाठ्यक्रम को पढ़ाये जाने, परीक्षा के तरीक़ों को अधिक कारगर बनाने की ओर ध्यान आकर्षित किया। मदरसों में छात्रों की तरबियत पर भी उन्होंने रोशनी डालते हुए कहा कि मौजूदा दौर में माहौल के बिगाड के कारण दिन ब दिन ज्यादा होते जा रहे हैं इसलिये छात्रों की निगरानी और तरबियत पर पहले से अधिक ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है और इस मुद्दे को बहुत संजीदगी से लिया जाना चाहिये।   अध्यक्ष ने मदरसों की जि़म्मेदारों पर ज़ोर दिया कि मदरसों के अध्यापकों, कर्मचारियों के वेतनों का स्तर मुनासिब रखा जाना चाहिये जिससे कम से कम दरमियानी अन्दाज़ की ज़रूरतें पूरी हो सकें। साथ ही उन्होंने कहा कि अच्छे और समर्थ कर्मचारियों और अध्यापकों की समय-समय पर हौसला अफ़ज़ाई की जानी चाहिये।

      बैठक का अहम प्रस्ताव राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया के नाजि़म मौलाना शौकत अली क़ासमी ने पेश किया। उन्होंने देश में सरगर्म सांप्रदायिक ताक़तों के गै़र-जि़म्मेदाराना बयानात पर चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयानात से देश की एकता और अखण्डता को अनावश्यक रूप से ख़तरा पैदा होता है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में धर्म विशेष की धार्मिक पुस्तकों को शामिल करने और कुछ धार्मिक रिवाजों जैसे सूर्य नमस्कार आदि को आवश्यक करने जैसे कदमों से भारतीय संविधान की आत्मा घायल हो रही है। प्रस्ताव में केन्द्र सरकार से मांग की गई कि वह अपनी संवैधानिक जि़म्मेदारियों को पूरा करे और इस तरह के कार्यों और बयानात पर रोक लगाये ताकि अल्पसंख्यकों में सुरक्षा की भावना पैदा हो और देश की धर्म निरपेक्ष छवि पर धब्बा ना आये।

      इससे पूर्व राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया के नाजि़म मौलाना शौकत अली ने सैक्रेटरी रिपोर्ट पढ़ कर सुनाई। उन्होंने कहा कि राबता मदारिस एक देश व्यापी और असरदार तन्ज़ीम है जिसका बुनियादी मक़सद दीनी मदरसों के पाठ्यक्रम और निज़ाम को चुस्त-दुरुस्त बनाना और उनके सामने आने वाली समस्याओं को दूर करने की कोशिश तथा मदरसों के खिलाफ़ की जाने वाली कोशिशों और षड्यन्त्रों पर नज़र रखना व उनको समाप्त करना है। उन्होंने मरकज़ी राबता मदारिस और देश के विभिन्न राज्यों में सरगर्म राज्य स्तरीय राबता कमेटी की कारगुजारी पर रोशनी डाली।

 

      ज्ञातव्य है कि 23 मार्च को बाद नमाज़ मग़रिब मेहमानख़ाने में राबता मदारिस की आमला की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता हज़रत मौलाना मुफ़्ती अबुल क़ासिम नौमानी साहब मोहतमिम दारुल उलूम देवबन्द ने की। इस बैठक में मदारिस इस्लामिया के सामने आने वाली समस्याओं के सिलसिले में विचार-विमर्श किया गया और उनके हल के लिये विभिन्न उपायों पर अहम फ़ैसले किये गये।

      राबता मदारिस के अधिवेशन की पहली बैठक में बोलने वालों में दारुल उलूम देवबन्द के सदर मुदर्रिस मौलाना सईद अहमद पालनपुरी ने कहा कि मदरसों के पाठ्यक्रमों और उनको पूरा पढ़ाये जाने पर ध्यान देना आज की एक अहम आवश्यकता है। उन्होंने पाठ्यक्रमों को आसान और असरदार बनाने पर ज़ोर दिया। मौलाना क़मरुद्दीन ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के विकास और तरबियत पर भी ज़ोर दिये जाने की आवश्यकता है। मौलाना रियासत अली ने कहा कि मदरसों के द्वारा सरकार से मदद प्राप्त करना हानिकारक है और इससे मदरसों की कार्यशैली प्रभावित होती है। मौलाना महमूद मदनी जनरल सैक्रेटरी जमीयत उलमा-ए-हिन्द ने कहा कि मदरसों में शैक्षिक मनोविज्ञान को लागू किया जाना चाहिये। मौलाना असरारूल हक़ क़ासमी अध्यक्ष तालीमी मिल्ली फ़ाउन्डेशन तथा संसद सदस्य ने कहा कि आधुनिक शिक्षा पाने वाले नौजवानों तक दीन की शिक्षा पहुंचाना मदरसों की ही जि़म्मेदारी है।

      अखिल भारतीय राबता मदारिस का यह अधिवेशन दारुल उलूम के मस्जिद रशीद में हुआ जिसमें पूरे देश के मशहूर ओर अहम मदरसों के साढे़ तीन हजार से अधिक उलमा शामिल हुए। अधिवेशन की शुरुआत पवित्र कुरान की तिलावत से हुई जो क़ारी अब्दुल रऊफ़ ने की और मौलाना शौकत अली ने अधिवेशन का संचालन किया।

      इस अधिवेशन में शामिल होने वाले अहम लोगों में कारी मुहम्मद उस्मान, मौलाना रहमतुल्लाह कशमीरी, मौलाना अब्दुल ख़ालिक़ मदरासी, मौलाना इबराहीम मलक, मौलाना अनवार बिजनौरी, मुफ़्ती शब्बीर अहमद, मौलाना अशफ़ाक़ आज़मी, मौलाना उसामा कानपुर, मौलाना कारी शौकत वेट, मौलाना क़ासिम पटना, मौलाना सिद्दीक़ुल्लाह चैधरी बंगाल, मौलाना अब्दुल क़ादिर आसाम, मौलाना शमसुद्दीन आसाम, मौलाना जै़नुल आबिदीन कर्नाटक, मौलाना ग़यासुद्दीन हैदराबाद, मौलाना इलियास हरियाणा, मौलाना खालिद मैवात, मौलाना सिराजुद्दीन मणिपुर, मौलाना ज़फ़रुद्दीन दिल्ली, मौलाना मुमताज़ शिमला, मौलाना अब्दुल शकूर केरल, मुफ़्ती रियाज़ तमिलनाडू, मुफ़्ती फ़ारूक़ मेरठ, क़ारी मुहम्मद अमीन राजस्थान, मुफ़्ती जलील महाराष्ट्र, मौलाना रहीमुद्दीन अन्सारी हैदराबाद, मौलाना हयातुल्लाह बहराईच, मौलाना अब्दुल हादी प्रतापगढ़ और मौलाना असजद क़ासमी मुरादाबाद के अलावा राबता मदारिस की कार्यकारिणी के सदस्यों और राज्य स्तरीय अध्यक्षों ने भाग लिया।

 
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Published Online by: Internet Dept., Darul Uloom - Deoband