मदरसे वाले पूरे देशवासियों के बीच इस्लाम के प्यार का संदेश फैलाऐं

मदरसे वाले पूरे देशवासियों के बीच इस्लाम के प्यार का संदेश फैलाऐं

मदरसों की शिक्षा प्रणाली और मौजूदा परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित

 

देउबंद, 13 मार्च (प्रेस नोट)

 

राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया के अखिल भारतीय सम्मेलन के महासभा की बैठक में दारुल उलूम देवबंद के हदीस शिक्षक और जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने मदारिसे इस्लामिया के ज़िम्मेदारों से कहा कि वह सभी देशवासियों के बीच इस्लाम के प्रेम व भाईचारगी के संदेश को आम करें और देश की वर्तमान महत्वपूर्ण परिस्थितियों में मदरसे वाले अपनी भूमिका निभाएं। राबता मदारिस की महासभा सम्मेलन की दूसरे और अंतिम बैठक में मौलाना मदनी ने अपना प्रमुख भाषण देते हुए कहा कि नफ़रत की राजनीति का मुक़ाबला नफ़रत से नहीं किया जा सकता, बल्कि प्यार व महुब्बत से होगा। मौलाना मदनी ने मदरसों को अपनी शैक्षिक प्रणाली में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि मदरसों में शिक्षा का मानक कम होता जा रहा है और वह इस प्रणाली के लिए अच्छी बात नहीं है।

 

राबता मदारिस इस्लामिया दारूल उलूम देवबंद की यह दूसरी और अंतिम बैठक जामे रशीद में मग़रिब की नमाज़ के बाद मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी मोहतमिम दारुल व अध्यक्ष राबता की अध्यक्षता में आयोजित हुई। प्रोग्राम का संचालन राबता मदारिस के महासचिव मौलाना शौकत अली कासमी बस्तवी ने अंजाम दी जब्कि दारुल उलूम देवबंद के शिक्षक क़ारी शफीकुर्रहमान की तिलावत से यह प्रोग्राम शुरू हुआ।

 

इस बैठक में दारुल उलूम देवबंद के हदीस शिक्षक मौलाना ह़बीबुर्रहमान आज़मी ने अपने महत्वपूर्ण संबोधन में कहा कि मदारिस को अकाबिर के बनाए हुए सिद्धांत पर क़ायम रहना ज़रूरी है और यही नियम इन मदारिस के अस्तित्व और विकास के लिए ज़रूरी हैं। उन्होंने कहा कि यदि मदारिस अकाबिर के सिद्धांत से हटेंगे तो वे समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि नुबुव्वत की विरासत के ह़ामिल उलमाए और अहले मदारिस को विपरीत परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए बल्कि पूरी हिम्मत के साथ हालात का मुकाबला करना चाहिए।

 

तहफ्फुज़ खत्मे नुबुव्वत विभाग के नाज़िम, दारुल उलूम के हदीस शिक्षक और जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना क़ारी मुहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने तहफ्फुज़ खत्मे नुबुव्वत के विषय पर बोलते हुए कहा कि खत्मे नुबुव्वत के अक़ीदे के महत्व पर रोशनी डालते हुए वर्तमान युग के फ़ितनों से आकर्षित किया और इस संबंध में मदारिसे इस्लामिया को अपनी खुसूसी भूमिका निभाने पर ध्यान दिलाया। जब्कि दारुल उलूम देवबंद के हदीस शिक्षक मौलाना क़मरुद्दीन गोरखपुरी ने अपने संबोधन में मदारिस के तरबियत के सिस्टम पर विशेष ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि फितनों से भरे हुए माहौल में छात्रों के धार्मिक और नैतिक तरबियत बहुत महत्वपूर्ण हैं, और इसका सबसे महत्वपूर्ण तरीका अच्छे और नेक लोगों की संगत अपनाना है। मदरसा रहीमया बांडीपुरा के मोहतमिम और दारुल उलूम देवबंद के शूरा के सदस्य मौलाना रह़मतुल्लाह कश्मीरी ने समाजी सुधार की अहम्मियत और ज़रूरत की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि सभी मदरसों को पहले अपनी सुधार और फिर समाजी सुधार की जिम्मेदारी चुकानी चाहिए।

 

राबता मदारिस इस्लामिया दारूल उलूम देवबंद की बैठक में मदरसों की तालीम और तरबियत की प्रणाली और मौजूदा मुल्की और वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किये गए। दारुल उलूम देवबंद के शिक्षक मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी ने मदारिसे इस्लामिया को उनके लक्ष्यों की स्थापना को पूरा करने के लिए सक्षम बनाने की ज़रूरत के बारे में पहला प्रस्ताव पेश किया और मदारिसे इस्लामिया को अतीत की तरह अच्छे उलमा तैयार करने के लिए आकर्षित किया। दूसरा प्रस्ताव दारुल उलूम के हदीस शिक्षक मौलाना अब्दुल खालिक़ संभली ने पेश किया और सदस्य मदरसों को राबता के वेफाक़ी सिस्टम को अधिकतम मजबूत बनाने पर ज़ोर दिया। दारुल उलूम देवबंद के शिक्षक मौलाना अब्दुल्लाह मारूफी ने देश में जारी इस्लाम दुश्मन गतिविधियों के रोकथाम के लिए संगठित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और उसी के संबंधित प्रस्ताव रखा। मौलाना मतीनुल हक़ उसामा कानपुरी ने इस्लामी दुनिया की राजनीतिक अब्तरी, फिलिस्तीन और विशेष रूप से शाम में जारी नरसंहार के सिलसिले में प्रस्ताव पेश किया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र और विश्व शक्तियां दोहरे पैमानों को छोड़कर ईमानदारी के साथ इन समस्याओं को ह़ल करें और विशेषकर मुस्लिम शासकों से अपील की गई कि वह ऐसे फैसले करें जो मुसलमानों की इज़्ज़त से हमआगंग और उनकी जुरअत व अज़ीमत के आइनादार हों। अंत में दारुल उलूम के शिक्षक मौलाना मुहम्मद अफ़ज़ल बस्तवी ने संवेदना प्रस्ताव पेश की और पिछले दिनों निधन होने वाले कुछ महत्वपूर्ण उलमा और अकाबिर के निधन पर शोक व्यक्त किया। दर्शकों ने सभी प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया और कुछ अन्य लोगों ने संक्षिप्त शब्दों में इन प्रस्तावों की ताईद की जिनमें मौलाना सिद्दीक़ुल्लाह चौधरी, मौलाना जमील अहमद मुज़फ्फर नगरी, मुफ्ती अफ्फान मंसूरपूरी, मौलाना मुहम्मद क़ासिम बनारस, मौलाना नेअमतुल्लाह झारखंड, मौलाना ख़ालिद, मौलाना मुज़म्मिल हुसैन मुजफ्फर नगरी, मौलाना शरीफ अहमद हैदराबाद आदि शामिल हैं।

 

राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया की महासभा की यह बैठक प्रोग्राम के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती अबुल क़ासिम नोमानी की दुआवों पर समाप्त हुई। इस बैठक में दारुल उलूम देवबंद के शिक्षकों के अलावा कार्यकारिणी के सदस्यों, राबता के राज्य अध्यक्षों और ज़िम्मेदारों ने शिरकत की।

 
मदरसे वाले पूरे देशवासियों के बीच इस्लाम के प्यार का संदेश 
RESOLUTIONS Passed in General Meeting of Rabta Madaris Islamia Arabia Darul Uloom Deoband
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Published Online by: Internet Dept., Darul Uloom - Deoband